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गुरुवार, 27 जनवरी 2022

यह सूना संसार था

 

यह सूना संसार था

जीवन पथ पर निकल पड़ा जब, यह सूना संसार था।

राह  नयी  और  अनजानी थी, न कोई आधार था।।

 

ऊँगली पकड़ी, हमें चलाया,दिशा दिखाई, मार्ग बताया।

दे पाथेय आश्वस्त कराया,साहस दे पुरुषार्थ जगाया।।

जहाँ जहाँ  भी  चलें   हैं  हम तो, संरक्षण साकार था।

जीवन पथ पर निकल पड़ा जब,यह सूना संसार था।।

 

शूल  बिछे  थे  मग में तूने, पदत्रान  दे हमें बचाया।

जब भी जख्म लगे थे तुमने,निज हाथों उपचार कराया।।

हमें  लगा  हम  ही चलते हैं, पर यह तेरा प्यार था।

जीवन पथ पर निकल पड़ा जब, यह सूना संसार था।।

 

निविड़ निशा में भटक गए थे,बीच राह में अटक गए थे।

सुरसा संकट मुंह बाए थी, जोश होश सब चटक गए थे।।

साँसें   अटक   रही   थी   तब   भी, तू   ही   प्राणाधार था।

जीवन   पथ   पर  निकल  पड़ा जब, यह सूना संसार था।।

 

नाव  भवंर  में जब भी आई, खुद पतवार संभाले थे।

नैया  डूब   रही  थी जब  भी, तुम सबके रखवाले थे।।

कैसे  कहूँ, क्या   क्या   थे  मेरे,  तू  ही खेवनहार था।

जीवन पथ पर निकल पड़ा जब, यह सूना संसार था।।

 

हे  गुरुवर   हे  मातु  तुमने, अनगिन है उपकार किया।

जीवन धन्य हुआ है अपना,तुमने ये जो प्यार दिया।।

शेष सांस और रुधिर तुम्हारा,यह अपना मनुहार था।

जीवन पथ पर निकल पड़ा जब,यह सूना संसार था।।

-उमेश यादव 22-2-21

रविवार, 23 जनवरी 2022

हमें मिली थी आजादी









*हमें मिली थी आजादी*

आजादी क्या कहीं मिली है,मिन्नत से मनुहारों से?

हमें मिली थी आजादी,  वीरो  के  प्रचंड प्रहारों से।।

 

हमसे फौज बना गोरों ने,हमपर अपना राज किया।

लूट लूट कर देश उन्होंने, हमको था बर्बाद किया।।

वे मौन रहे थे, मूक हुए थे, फिरंगी अत्याचारों से।

हमें  मिली थी आजादी,  वीरों के प्रचंड प्रहारों से।।

 

क्रांतिकारियों को सुभाष ने, फांसी चढते देखा था।

समर्थन की आस थी जिनसे,खींचा लक्ष्मणरेखा था।।

इन्कलाब किया बोस ने, अपने प्रखर विचारों से।

हमें मिली थी  आजादी,  वीरों के प्रचंड प्रहारों से।।

 

जर्मनी जापान गए, वीरों की फौज बनायी थी।

*आजाद हिन्द*से गोरों की, सत्ता तब घबराई थी।।

जोश भरा हर वासी में,  सिंह गर्जन हुंकारों से।

हमें मिली थी आजादी,  वीरों के प्रचंड प्रहारों से।।

 

दिल में जोश जगाया उनने, देशप्रेम सिखलाया।

*खून के बदले आजादी*से,वीरों में शौर्य जगाया।।

धोखा भी खाया सुभाष ने, अपने ही गद्दारों से ।

हमें मिली थी आजादी, वीरों के प्रचंड प्रहारों से।।

 

आजादी के लिए वीरों ने,अपना रक्त बहाया था।।

अस्त्र शस्त्र लेकर वीरों ने, देश आजाद कराया था।

आजादी का जोश जगा था,नेता जी के नारों से।

हमें मिली थी आजादी, वीरों के प्रचंड प्रहारों से।।

-उमेश यादव,शांतिकुंज,हरिद्वार #umeshpdyadav