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शनिवार, 10 अगस्त 2024

आरती त्रिलोकधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥

आरती त्रिलोकधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥

 
स्वयं जगदीश्वर हैं प्रभु आप, हरते मानव मन के पाप। 
 मिटाते मनुजों के त्रयताप, हरो अब जगती के संताप॥ 
 प्रजा के पालक, सृष्टि संचालक, कृपानिधि मंगलकारी की॥ 
 आरती त्रिलोक धारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ 

 कथा में सुरभित प्रेम सुगंध,मन से मिटते सारे द्वन्द। 
 करे जो भागवत का सत्संग, पाते जीवन का आनंद॥ 
 शत्रु की हार, सुखी संसार, प्रभु त्रिभुवन हितकारी की। 
 आरती मुरलीधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ 

 होवे कष्ट मुक्त संसार, पाए मानवता विस्तार। 
 दिखाएं मार्ग मोक्ष का द्वार, कृपा से भवसागर हों पार॥ 
 हरे अज्ञान, बढ़े विज्ञान, बजे धुन वंशीधारी की। 
 आरती मुरलीधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ 

 तुझी में साधन भक्ति ध्यान, तुम्हीं से पाते सिद्धि ज्ञान ॥ 
 स्नेहिल प्रेममयी अभियान, श्रीमद्भागवत ज्ञान महान॥ 
तुम्हीं श्रीराम, तुम्हीं घनश्याम, दुलारे यशोमति प्यारी की। 
 आरती मुरलीधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ 

 देवकी नंदन श्री नंदलाल, सुशोभित मोर पंख हैं भाल॥ 
 करते दुष्ट दलन विकराल, आप ही हैं कालों के काल। 
 पाप संहारक, पुण्य विस्तारक, प्रभु गोवर्धन धारी की॥ 
 आरती मुरलीधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ 

 प्रभु की लीला गुण अनुवाद जहां है प्रेम भक्ति का स्वाद। 
 श्रीमदभागवत दिव्य प्रसाद, पाए प्राणी आशीर्वाद॥ 
 भक्तिमय कथा, मिटाती व्यथा, कृष्ण श्री लीलाधारी की। 
 आरती मुरलीधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ 

 दिया जब शृंगी ऋषि ने शाप,परीक्षित के मन था संताप। 
प्रभु की लीला पुण्य प्रताप, हुआ मन निर्मल और निष्पाप॥ 
 संशय मिटा, आश्रय मिला, कृपा श्री रास बिहारी की॥ 
 आरती मुरलीधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ 

 छोड़कर विषय भोग अनुराग, करें हम जनमंगल हित त्याग॥ 
बजे उर मुरलीधर की राग, बढ़ाएं भागवत से अनुराग ॥ 
 सुदर्शन चक्र, शेष का छत्र, अनुग्रह विपिन बिहारी की॥ 
 आरती मुरलीधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ 
-उमेश यादव

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