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शुक्रवार, 9 अगस्त 2024

आरती श्री गिरधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की।

आरती त्रिलोकधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ (आरती मुरलीधारी की, आरती रासबिहारी की॥) देवों के देव प्रभु हैं आप, हरते मानव मन के पाप मिटाते मनुजों के त्रयताप,हरो अब जगती के संताप, प्रजा के पालक, सृष्टि संचालक, कृपानिधि मंगलकारी की॥ आरती त्रिलोकधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ कथा में सुरभित प्रेम सुगंध। कथा से मिटते सारे द्वन्द। होते दैन्य मनुज के मंद, पाते जीवन का आनंद॥ शत्रु की हार, सुखी संसार, प्रभु त्रिभुवन हितकारी की। आरती त्रिलोकधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ होवे कष्ट मुक्त संसार, पाए मानवता विस्तार। दिखाये मार्ग मोक्ष का द्वार,कथा से भवसागर हों पार॥ हरे अज्ञान, दिलाते ज्ञान, बजे धुन वंशीधारी की। आरती त्रिलोकधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ तुझी में साधन भक्ति ध्यान, तुझी से पाते सिद्धि ज्ञान ॥ सुरभित प्रेममयि अभियान, श्रीमद्भागवत भगवान् ॥ तुम्हीं श्रीराम, तुम्हीं घनश्याम, दुलारे यशोमति प्यारी की। आरती त्रिलोकधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ दयानिधि देवकी माँ के लाल,सुशोभित मोर पंख हैं भाल॥ आप हैं कालों के भी काल। क्रांति की जलती लाल मशाल। पाप संहारक, पुण्य विस्तारक, प्रभु गोवर्धन धारी की॥ आरती त्रिलोकधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ परीक्षित-शुक का शुभ संवाद, प्रभु की लीला गुण अनुवाद। जहां है भक्ति प्रेम का स्वाद, पाए प्राणी आशीर्वाद॥ भक्तिमय कथा, मिटाती व्यथा, कृष्ण श्री लीलाधारी की। आरती श्री गिरधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की। दिया जब शृंगी ऋषि ने शाप, परीक्षित के मन था संताप। शुकदेव परीक्षित वाद, प्रभु की लीला गुण अनुवाद॥ संशय मिटे,आशय मिले, कृपा श्री रास बिहारी की॥ आरती त्रिलोकधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥ छोड़कर विषय भोग अनुराग, करें हम जनमंगल हित त्याग॥ बजे उर बंशीधर की राग, बढ़ाएं भागवत से अनुराग ॥ सुदर्शन चक्र, शेष का छत्र, अनुग्रह विपिन बिहारी की॥ आरती त्रिलोकधारी की। भागवत कृष्ण मुरारी की॥  -उमेश यादव

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