*आरती भागवत महापुराण की।*
आरती भागवत महापुराण की।
जयति जय जय गुण निधान की॥
श्री कृष्ण शुभचरित गान की॥
आरती अति पावन पुराण की॥
जन्म मृत्यु भय नष्ट कारिणी।
दुख विनासिनी, सुख प्रसारिणी॥
जगत तारिणी, त्रिताप हारिणी।
श्रीमद् भागवत
गूढ़ ज्ञान की।
आरती भागवत महापुराण की।।
सर्व व्यापी सर्वत्र निवासिनी।
ईश्वर तत्व रहस्य प्रकाशिनी।
चर अचर जड़ जीव वासिनी॥
निर्मल पावन दिव्य ज्ञान की।
आरती भागवत महापुराण की।।
दिव्य अलौकिक पीयूष महारस।
शुक मुख वाचित ज्ञान सुपारस।
धर्म भक्ति विज्ञान सुधारस॥
आरती श्री हरि कृपानिधान की।
आरती भागवत महापुराण की।।
प्रेम पथिक उर रास विलासिनी
प्रमुदित हृदय सुमधुर भाषिणी॥
सर्वमंगल सर्व सृष्टि हासिनी।
संजीवनी प्रभु चरित ध्यान की॥
आरती भागवत महापुराण की॥
लीलाधर की लीला न्यारी।
दुष्ट दलन सर्व संकट हारी॥
चरण शरण प्रभु हे गिरधारी।
जय जय जय सर्व सुखनिधान की।
आरती भागवत महापुराण की॥
काम क्रोध मद लोभ नष्ट हो।
विषय विलास भोग ध्वस्त हो॥
बोधित प्रज्ञा पथ प्रशस्त हो।
मिटे जड़ता, हो गमन ज्ञान की॥
आरती भागवत महापुराण की॥