रचनाकार: उमेश यादव
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🎵 श्रीकृष्ण भजन — मेरे मोहन मेरे घनश्याम
🙏 जय श्रीकृष्ण! 🎶 श्रीकृष्ण भक्ति भजन ✍️ रचनाकार: उमेश यादव हे यदुनन्दन! हे घनश्याम! हे मुरलीधर! कृपानिधान।। श्याम सुंदर! घनश्याम! तेरी वंशी में गूँजे नाम। प्राण-प्राण में तू ही रमणा, मेरे मोहन! मेरे गिरिधर श्याम।। धड़कन-धड़कन रास समाया, श्वास-श्वास में तेरी प्रीति। यमुना तट पर मधुर तान छेड़ी, गोपिनियाँ गाएँ सुरमयी गीति।। जग के हृदय में प्रेम जगाया, गूँजे वृंदावन हर धाम।। माखन चोर! दया के सागर, भक्तों के तुम कष्ट हरो। जग के पाप-अधर्म हरन कर, धर्म की ज्योति निरंतर भरो।। हर अँधियारे जीवन पथ में, बनकर दीप दिखाओ श्याम।। गीता के उपदेश अमर हैं, सत्य-प्रेम के दीप प्रखर हैं। रणभूमि में जो गूँज उठी थी, जीवन-पथ पर वही मुखर हैं।। कर्मयोग का संदेश सुनाकर, जग के नायक बने घनश्याम।। राधा संग जो प्रेम सुधा दी, उससे जग का मन हरषाया। भक्ति-भाव में तन-मन डूबा, हर जिह्वा ने नाम सुनाया।। भर दो मन में आनंद-धाम, सदा सहारा रहो श्री श्याम।। श्याम सुंदर! घनश्याम! तेरी वंशी में गूँजे नाम। प्राण-प्राण में तू ही रमणा, मेरे मोहन! मेरे घनश्याम।। रचनाकार: उमेश यादव
🙏 जय श्रीकृष्ण! 🎶 श्रीकृष्ण भक्ति भजन ✍️ रचनाकार: उमेश यादव हे यदुनन्दन! हे घनश्याम! हे मुरलीधर! कृपानिधान।। श्याम सुंदर! घनश्याम! तेरी वंशी में गूँजे नाम। प्राण-प्राण में तू ही रमणा, मेरे मोहन! मेरे गिरिधर श्याम।। धड़कन-धड़कन रास समाया, श्वास-श्वास में तेरी प्रीति। यमुना तट पर मधुर तान छेड़ी, गोपिनियाँ गाएँ सुरमयी गीति।। जग के हृदय में प्रेम जगाया, गूँजे वृंदावन हर धाम।। माखन चोर! दया के सागर, भक्तों के तुम कष्ट हरो। जग के पाप-अधर्म हरन कर, धर्म की ज्योति निरंतर भरो।। हर अँधियारे जीवन पथ में, बनकर दीप दिखाओ श्याम।। गीता के उपदेश अमर हैं, सत्य-प्रेम के दीप प्रखर हैं। रणभूमि में जो गूँज उठी थी, जीवन-पथ पर वही मुखर हैं।। कर्मयोग का संदेश सुनाकर, जग के नायक बने घनश्याम।। राधा संग जो प्रेम सुधा दी, उससे जग का मन हरषाया। भक्ति-भाव में तन-मन डूबा, हर जिह्वा ने नाम सुनाया।। भर दो मन में आनंद-धाम, सदा सहारा रहो श्री श्याम।। श्याम सुंदर! घनश्याम! तेरी वंशी में गूँजे नाम। प्राण-प्राण में तू ही रमणा, मेरे मोहन! मेरे घनश्याम।। रचनाकार: उमेश यादव
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