*दशावतार –मानव विकास की कथा*
जय जगदीश्वर,जय परमेश्वर , तुमने संसार बनाया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥
अनुपम जगत बसाया॥
दशावतार मानव
विकास के, अनुक्रम को बतलाता है|
घटघट वासी
ईश्वर का अनुपम,रूप हमें दिखलाता है॥
सद्ग्रंथों की
कहानियों में, अद्भुत ज्ञान समाया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥1॥
महाप्रलय
पश्चात सिन्धु था, जलीय जीव विकसाए थे|
सतत विकास के
क्रम में भगवन,मीन रूप धर आये थे॥
वेद ज्ञान
संचित रख प्रभु ने,शाश्वत ज्ञान बचाया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥2॥
विकसित हुए
उभयचर प्राणी,जल में थल में जीव विराजे|
उभय स्थान पर
रहने वाले, जीव जंतु जगत में साजे॥
प्रभु कछुए का
रूप धरे , धरती का भार उठाया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥3॥
हिरण्याक्ष ने
पुण्य धरा को, जलधि मध्य डुबाया|
दुष्ट असुर का
वध कर प्रभु ने, संकट दूर भगाया॥
वराह रूप धारण
कर प्रभु ने, धरती पुनः बसाया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥4॥
वन सम्पदा बढ़ी
धरती पर, वन्य जीव उपजाए|
इसी प्रगति के
क्रम में भूपर, विविध जीव विकसाए॥
इस विकास के
क्रम में ईश्वर, नृसिंह बनकर आया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥5॥
वनमानुष सा तब
मानव का, धरती पर आवास हुआ|
मानव का इस
कालखंड में,लघु से पूर्ण विकास हुआ॥
वामन रूप से विकसित
मानव, पूर्ण धरा पर छाया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥6॥
पाषाण युगीन
मानव थे वे, आखेट किया करते थे|
पत्थर परशु कुठार
आदि से, निज रक्षा करते थे॥
परशुराम अवतार
धरे प्रभु, निज अभियान चलाया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥7॥
मानवता के विकास
क्रम में, असुरों ने त्रास मचाया था|
मानव ने तब प्रगति
पंथ पर, धनुष बाण अपनाया था॥
नीति-नियम-मर्यादा
का युग, राम राज्य में आया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥8॥
चक्र वंशी हल हाथ
लिए प्रभु, द्वापर युग में आये|
ज्ञान कर्म और
भक्ति योग का, गीता ज्ञान सुनाये॥
कृषि और
गोपालन से हमने, प्रगति का क्रम अपनाया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥9॥
धर्म अहिंसा करुणा
ममता, का व्यापक विस्तार हुआ|
मानव में अब
बुद्धि बढ़ी थी,बोध भाव साकार हुआ॥
बुद्धावतार में
भगवन तुमने, विज्ञ मनुज विकसाया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥10॥
पंख लगे अब प्रगति
चक्र में,आसमान तक पहुंचे|
अणु में, विभु
में,दिग दिगंत तक,नभ से भी हो गए ऊँचे॥
ले प्रज्ञा
अवतार कल्कि प्रभु ने, चिंतन श्रेष्ठ बनाया|
सृष्टि सृजन कर
दशावतार ले,यह संसार बसाया॥11॥
-उमेश यादव, शांतिकुंज,
हरिद्वार
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