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गुरुवार, 12 दिसंबर 2024

दशावतार –मानव विकास की कथा

 *दशावतार –मानव विकास की कथा*

जय जगदीश्वर,जय परमेश्वर , तुमने संसार बनाया| 

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥

                      अनुपम जगत बसाया॥

 

दशावतार मानव विकास के, अनुक्रम को बतलाता है|

घटघट वासी ईश्वर का अनुपम,रूप हमें दिखलाता है॥

सद्ग्रंथों की कहानियों में, अद्भुत ज्ञान समाया|

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥1॥

 

महाप्रलय पश्चात सिन्धु था, जलीय जीव विकसाए थे|

सतत विकास के क्रम में भगवन,मीन रूप धर आये थे॥

वेद ज्ञान संचित रख प्रभु ने,शाश्वत ज्ञान बचाया|

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥2॥

 

विकसित हुए उभयचर प्राणी,जल में थल में जीव विराजे|

उभय स्थान पर रहने वाले, जीव जंतु जगत में साजे॥

प्रभु कछुए का रूप धरे , धरती का भार उठाया|

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥3॥

 

हिरण्याक्ष ने पुण्य धरा को, जलधि मध्य डुबाया|

दुष्ट असुर का वध कर प्रभु ने, संकट दूर भगाया॥

वराह रूप धारण कर प्रभु ने, धरती पुनः बसाया|  

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥4॥

 

वन सम्पदा बढ़ी धरती पर, वन्य जीव उपजाए|

इसी प्रगति के क्रम में भूपर, विविध जीव विकसाए॥

इस विकास के क्रम में ईश्वर, नृसिंह बनकर आया|

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥5॥

 

वनमानुष सा तब मानव का, धरती पर आवास हुआ|

मानव का इस कालखंड में,लघु से पूर्ण विकास हुआ॥

वामन रूप से विकसित मानव, पूर्ण धरा पर छाया|

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥6॥

 

पाषाण युगीन मानव थे वे, आखेट किया करते थे|

पत्थर परशु कुठार आदि से, निज रक्षा करते थे॥

परशुराम अवतार धरे प्रभु, निज अभियान चलाया|

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥7॥

 

मानवता के विकास क्रम में, असुरों ने त्रास मचाया था|

मानव ने तब प्रगति पंथ पर, धनुष बाण अपनाया था॥

नीति-नियम-मर्यादा का युग, राम राज्य में आया|

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥8॥

 

चक्र वंशी हल हाथ लिए प्रभु, द्वापर युग में आये|

ज्ञान कर्म और भक्ति योग का, गीता ज्ञान सुनाये॥

कृषि और गोपालन से हमने, प्रगति का क्रम अपनाया|

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥9॥

 

धर्म अहिंसा करुणा ममता, का व्यापक विस्तार हुआ|

मानव में अब बुद्धि बढ़ी थी,बोध भाव साकार हुआ॥

बुद्धावतार में भगवन तुमने, विज्ञ मनुज विकसाया|

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥10॥

 

पंख लगे अब प्रगति चक्र में,आसमान तक पहुंचे|

अणु में, विभु में,दिग दिगंत तक,नभ से भी हो गए ऊँचे॥

ले प्रज्ञा अवतार कल्कि प्रभु ने, चिंतन श्रेष्ठ बनाया|

सृष्टि सृजन कर दशावतार ले,यह संसार बसाया॥11॥

-उमेश यादव, शांतिकुंज, हरिद्वार

 

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